नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप संकष्टी गणेश चतुर्थी पूजा विधि / Sankashti Ganesh Chaturthi Puja Vidhi PDF in Hindi प्राप्त कर सकते हैं। संपूर्ण भारत वर्ष में भगवान गणेश की पूजा बड़े ही धूमधाम से की जाती है आज के दिनों में केवल भारत में ही नहीं संपूर्ण संसार में भगवान गणेश की पूजा की जाती है जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भगवान गणेश को सर्वप्रथम पूजे जाने का वरदान प्राप्त है इसलिए हिंदू धर्म के अनुसार किसी भी काम को करने से पूर्व भगवान गणेश की पूजा की जाती है और जो भी व्यक्ति सच्चे दिल से भगवान गणेश की पूजा करता है वह मंगलमय जीवन व्यतीत करता है।
किसी भी व्रत को संपूर्ण करने हेतु सही विधि का ज्ञान होना बहुत ही आवश्यक है किसी भी व्रत को संपूर्ण करने हेतु सही विधि का ज्ञान होना बहुत ही आवश्यक है यदि बिना सही विधि के व्रत किया जाता है तो व्रत महत्वहीन हो जाता है हम संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा पहले ही प्रदान कर चुके हैं आप यहां से बिना किसी परेशानी के संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि देख सकते हैं और नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।
संकष्टी गणेश चतुर्थी पूजा विधि | Sankashti Ganesh Chaturthi Puja Vidhi PDF in Hindi – सारांश
PDF Name | संकष्टी गणेश चतुर्थी पूजा विधि | Sankashti Ganesh Chaturthi Puja Vidhi PDF in Hindi |
Pages | 2 |
Language | Hindi |
Source | pdfinbox.com |
Category | Religion & Spirituality |
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संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि | Sankashti Ganesh Puja Vidhi PDF
- गणेश जी की पूजा करने के लिए सबसे पहले हथेली में जल, अक्षत एवं पुष्प लेकर भगवान का ध्यान करें।
- इसके बाद पुष्प और अक्षत लेकर चौकी को समर्पित करें।
- फिर एक सुपारी में मौली लपेटकर उसको चौकी पर स्थापित कर दें।
- इस बात का ध्यान रखें कि कलश उत्तर पूर्व दिशा और चौकी की बाई ओर हो स्थापित हो।
- इन सब के बाद भगवान गणेश को याद करें और भगवान के चरणों में अपना ध्यान लगाएं।
- उसके बाद भगवान के सामने दीप जलाएं अंत में पंचोपचार के अनुसार भगवान गणेश की पूजा करें।
जो निम्नलिखित प्रकार से है –
- सबसे पहले आवन प्रक्रिया प्रारंभ करें।
- इसके बाद स्थान ग्रहण करें।
- एक हथेली में जल लेकर भगवान गणेश मंत्र पढ़ते हुए भगवान गणेश के चरणों को जल को अर्पित करें।
- फिर चंद्रमा का मंत्र पढ़ते हुए तीन बार जल चढ़ाएं।
- उसके बाद पान का पत्ता लेकर छींटें मारे।
- इसके बाद भगवान को सिलेसिलाए वस्त्र, एवं कलावा चढ़ाएं. मालाएं, पगड़ी, जनेऊ, हार, आदि अर्पित करें।
- और सबसे अंत में फूल, धूप, दीप, पान के पत्ते पर फल, मिठाई, मेवे आदि अवश्य अर्पित करें।
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