वट सावित्री व्रत कथा | Vat Savitri Vrat Katha in Hindi PDF

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप वट सावित्री व्रत कथा / Vat Savitri Vrat Katha in Hindi PDF  प्राप्त कर सकते हैं। इस व्रत को ज्येष्ठ माह में अवश्य और इसी माह की पूर्णिमा को रखा जाता है हिंदू धर्म के अंतर्गत इस व्रत को बहुत ही पवित्र माना जाता है जो भी स्त्री इस व्रत को रखती है उस स्त्री के पति की उम्र बढ़ती है और संतान की प्राप्ति होती है वैसे तो यह व्रत संपूर्ण भारत में बहुत ही प्रसिद्ध है परंतु मुख्य रूप से उत्तर भारत और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में इसको अधिक मान्यता प्राप्त है।

ऐसा माना जाता है कि जो भी स्त्री सच्चे दिल से इस व्रत को करती है उसको जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता और मनचाही वस्तु की प्राप्ति होती है साथ ही उसके पति की उम्र में वृद्धि होती है और उसकी गोद कभी भी सुनी नहीं होती आज इस लेख के माध्यम से वट सावित्री की कहानी को पढ़ सकते हैं साथ ही नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके कथा की पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं ।

 

वट सावित्री व्रत कथा | Vat Savitri Vrat Katha in Hindi PDF – सारांश

PDF Name वट सावित्री व्रत कथा | Vat Savitri Vrat Katha in Hindi PDF
Pages 1
Language Hindi
Source pdfinbox.com
Category Religion & Spirituality
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वट सावित्री की व्रत कथा | Vat Savitri Ki Vrat Katha PDF

पौराणिक, प्रामाणिक और प्रचलित वट सावित्री व्रत कथा के अनुसार सावित्री का पति अल्पायु था, उसी समय देव ऋषि नारद ने आकर सावित्री से कहा कि तुम्हारा पति अल्पायु है। तुम दूसरा वर मांगो। लेकिन सावित्री ने कहा – मैं एक हिंदू महिला हूं, मैं केवल एक बार अपना पति चुनती हूं। उसी समय सत्यवान के सिर में बहुत पीड़ा होने लगी।

सावित्री ने बरगद के पेड़ के नीचे अपने पति का सिर गोद में रखकर उन्हें लिटा दिया। उसी समय सावित्री ने देखा कि यमराज बहुत से यमदूतों को लेकर पहुंचे हैं। सत्यवान की आत्मा को दक्षिण की ओर ले जाना। यह देखकर सावित्री भी यमराज के पीछे हो लेती है।

उसे आते देख यमराज ने कहा- हे पतिव्रता स्त्री! पत्नी अपने पति को धरती तक ही सहारा देती है। अब तू लौट जा। इस पर सावित्री ने कहा- मेरे पति जहां रहेंगे, वहीं मुझे उनके साथ रहना है। यह मेरी पत्नी का धर्म है। सावित्री के मुख से यह उत्तर सुनकर यमराज बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने सावित्री से वर मांगने को कहा और कहा- मैं तुम्हें तीन वर दूंगा। बताओ तुम कौन से तीन वर लोगे?

तब सावित्री ने सास-ससुर के लिए नेत्र ज्योति मांगी, ससुर का खोया हुआ राज्य मांगा और अपने पति सत्यवान के सौ पुत्रों की माता बनने का वरदान मांगा। जब यमराज जी ने सावित्री के के तीन वरदान सुने तो उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया और कहा तथास्तु! ऐसा ही होगा। सावित्री फिर उसी बरगद के पेड़ पर लौट आई। जहां सत्यवान मृत पड़ा था। सत्यवान के शव का फिर संचार हुआ।

इस प्रकार सावित्री ने अपने पति के व्रत के प्रभाव से न केवल अपने पति को जीवित कर दिया, बल्कि अपनी सास और ससुर को नेत्र ज्योति प्रदान करके खोया हुआ राज्य भी अपने ससुर को लौटा दिया। कानून।
तभी से वट सावित्री अमावस्या और वट सावित्री पूर्णिमा पर बरगद के पेड़ की पूजा करने का विधान है। इस व्रत को करने से सौभाग्यवती स्त्रियों की मनोकामना पूर्ण होती है और उनका सौभाग्य अखंड रहता है।

 

वट सावित्री व्रत पूजा विधि

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